मेरे तो गिरधर गोपाल,
दूसरो न कोई!
जाके सिर मोर मुकुट,
मेरो पित सोई! मेरे तो ...
छड़ी दै कुल की कानी,
का करिहे कोई!
संतान डग बैठी बैठी,
लोक-लाज खोई! मेरे तो ...
असुँ जल चीच-सीच,
प्रेम बेल बोई!!
अब तो बेल फेल बाई,
अनंद फल होई!! मेरे तो...
भगत देख राजी हुई,
जगत देख रोई!
दासी "मीरा" लाल गिरधर
तारो अब मोही !!
मेरे तो गिरधर गोपाल,
दूसरो न कोई!!
शनिवार, 29 सितंबर 2007
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